Aakhri Maafi "Har jurm ki saza jail nahi hoti...
क्या हर जुर्म की सज़ा अदालत में मिलती है?
विक्रम सिंघानिया एक बेहद सफल बिज़नेसमैन था, लेकिन बारह साल पुराने एक काले सच ने उसकी परफेक्ट ज़िंदगी को रातों-रात पलट दिया। एक रात उसे एक पुराना लिफ़ाफ़ा और एक लाल डायरी मिलती है... जिसमें दर्ज़ थी एक बेकसूर कर्मचारी की चीखें और उसके बर्बाद हुए परिवार का दर्द। पढ़िये 'आखरी माफ़ी'—एक ऐसी स्लो-बर्न साइकोलॉजिकल थ्रिलर कहानी, जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगी कि इंसान कानून के हाथों से तो बच सकता है, लेकिन अपने ज़मीर की अदालत से नहीं।
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