Nyay Ya Badla? "Jab dard had se badh jata hai... to sabse mushkil ladai apne hi andar shuru hoti hai."
जब एक मासूम बेटी भयानक अपराध का शिकार होती है, तो एक सीधे-सादे पिता का दुनिया से विश्वास उठ जाता है। न्याय मिलने में हो रही देरी उसे बदले की आग में धकेलती है। लेकिन क्या एक और अपराध किसी बेटी को वापस ला सकता है? पढ़िए एक पिता के दर्द, गुस्से और न्याय के बीच की सबसे मुश्किल मनोवैज्ञानिक लड़ाई की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी।
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